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दिल की दिल में ना रखें !  एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भावनाओं को प्रकट करने की बजाय उसे दबाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता ह...


दिल की दिल में ना रखें

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भावनाओं को प्रकट करने की बजाय उसे दबाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है| ऐसा करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है| अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेंनसिल्वेनिया में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि जो युवा अपनी भावनाओं को दबाते हैं, उनकी प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कारण ज्यादा सूजन पैदा होने लगती है| इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है| यह अध्ययन साइकोसोमेटिक मेडिसिन जनरल में प्रकाशित हुआ है| यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर  हैनाह  स्चरीयर कहती हैं कि यह प्रभाव किसी के स्वास्थ्य पर एक या दो हफ्ते में नहीं पड़ता हैं, बल्कि कुछ सालों में इसका प्रभाव होता है|
आंखें सब कुछ कहती हैं|
आपकी आंखें देखकर बताया जा सकता है कि आप तनाव में है या नहीं| एक नए अध्ययन में पाया गया है कि आंखों की पुतलियों का फैलाव देखकर किसी व्यक्ति के तनाव के स्तर का पता लगाया जा सकता है | अमेरिका की 'यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी' में असिस्टेंट प्रोफेसर जंग हयूप किम कहते हैं, "कई लोग, एक से अधिक कार्य करते हैं | इस दौरान उनकी मानसिक स्थिति का पता लगाने में आंखों की पुतलियों का फैलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है | "इस अध्ययन के परिणामों के जरिए यह संभव होगा कि कैसे वर्किंग एनवायरमेंट को डिजाइन किया जाए, ताकि कर्मियों के बीच मानसिक तनाव को रोका जा सके | यह अध्ययन 'ह्यूमन कंप्यूटर जनरल' में प्रकाशित किया गया है|

रिश्तो के कितने साथ हैं आप, रिश्तो को जिंदा रखने के लिए उन्हें वक्त, इज्जत और इंपॉर्टेंस देना बहुत जरूरी है|
पति-पत्नी के रिश्ते को समझने के लिए हमेशा संवेदनशीलता की जरूरत होती है| संवेदनशील मन से ही इसे समझा जा सकता है| यह एक आसान रिश्ता जरूर है, लेकिन एक बार उलझ जाए तो सुलझाना आसान नहीं होता| कई बार सुलझाने की कोशिश में और उलझ जाता है| आज के दौर में जिंदगी बड़ी व्यस्त रहने लगी है| इस व्यस्त समय में अमूमन दंपति अपना मी टाइम भूलने लगे हैं| शेयरिंग न होने से दूरियां बढ़ने लगी है| जरा सा वक्त दांपत्य को बड़े खतरे से उबार सकता है| इसलिए जरूरी है कि रिश्ते के लिए समय निकालें| हम सब एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जब अक्सर नौकरी के लिए हमें अपना शहर छोड़कर किसी और शहर या महानगर को ठिकाना बनाना होता है| नौकरियों के लिए अपने शहरों से दूर दूसरे शहरों में बसे लोगों के सामाजिक संबंध भी उतने गहरे नहीं हो पाते | चूकि अन्य रिश्तो से कट जाते हैं, इसलिए भी पति-पत्नी की एक-दूसरे से अपेक्षाएं बढ़ जाती हैं| वे अपेक्षाएं पूरी नहीं हो पाती, तो शिकायतें बढ़ने लगती है| इस रिश्ते के लिए और भी कुछ बातें जरूरी है| एक तो शिकायतों से बचना चाहिए और अगर शिकायतें  आएं, तो उस पर ध्यान देना जरूरी है| साथी की शिकायत को नजरअंदाज करना ठीक नहीं| हां, यह हो सकता है कि साथी की हर बात न  मानी जा सके, लेकिन उसकी शिकायत को धैर्य से सुना जा सकता है| इसलिए थोड़ा समय जरूर निकालें| यह ऐसा निवेश है, जो भविष्य में संबंधों को खुशगवार बनाए रखेगा| और हां, खुशी के बहाने जरूर खोजें| बर्थडे, मैरिज एनिवर्सरी जैसी तारीख  याद रखें| एक-दूसरे के महत्व का अहसास कराते रहने के लिए छोटे-छोटे गिफ्ट्स और अवसरों का बड़ा महत्व होता है| साथ घूमे और साथ-साथ सपने भी देखें|

क्या आप बच्चे को संगीत  सिखाते  हैं ? संगीत मनोरंजन है , ध्यान है , उदासी का साथी है | बच्चों के लिए संगीत वरदान है | तो फिर आप अपने बच...


क्या आप बच्चे को संगीत सिखाते हैं? संगीत मनोरंजन है, ध्यान है , उदासी का साथी है | बच्चों के लिए संगीत वरदान है | तो फिर आप अपने बच्चे को संगीत क्यों नहीं सिखाते ?
बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ संगीत सिखाने का विचार शायद सबको पसंद न आए , लेकिन अनेक अनुसंधानो में यह बात सिद्ध हो चुकी है कि संगीत बच्चों के मस्तिष्क को प्रखर करता है| संगीत सिर्फ मन बदलाव का माध्यम ही नहीं है , बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभप्रद है , फिर चाहे वह भारतीय संगीत हो या पाश्चात्य | वैज्ञानिकों के मुताबिक जन्म के 1 साल तक बच्चे के मस्तिष्क तक यदि संगीत की मधुर धुन पहुंचती है , तो इसका असर होता है| संगीत से सुनने समझने और सीखने की शक्ति बढ़ती है, जिससे  वरबल आईक्यू, स्मरण शक्ति में तेजी आती है| देखा गया है कि जिस बच्चे का संगीत के प्रति झुकाव होता है, वह भाषा सीखने में पारंगत होता है| विशेषज्ञों के अनुसार, संगीत सीखने से बच्चों के मस्तिष्क का dkWVsZDl मजबूत होता है dkWVsZDl मस्तिष्क में रीजनिंग, थिंकिंग या इमैजिनेशन में मददगार होता है| अक्सर बच्चों को गणित का विषय अच्छा नहीं लगता, लेकिन संगीत सीखने से गणित में मदद मिलती है| न्यूरोसाइंटिस्ट नीना क्रॉस ने अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ एडवांसमेंट ऑफ साइंस की बैठक में बताया था कि संगीत सभी बच्चों को फायदा पहुंचाता है| इनमें डिस्लेक्सिया और ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे भी शामिल हैं| अनुसंधानकर्ताओं का मानना है कि वाद्ययंत्र बजाने से मस्तिष्क के निचले हिस्से ब्रेन स्टेम में प्रक्रिया शुरू हो जाती है| निष्कर्षों से पता चला है कि इंस्ट्रुमेंटल म्यूजिक से छात्रों में प्रैक्टिस करने के लिए अनुशासन विकसित होता है| कई शोधों के अनुसार, संगीत में रुचि लेना शरीर में डोपामाइन हार्मोन का स्त्राव करता है, जो व्यक्ति में जोश और प्रेरणा का संचार करता है| धीमी गति की धुन अर्थात बिना शब्दों वाला संगीत मन को शांति देता है, तनाव कम करता है, बढ़ी हुई हृदय गति में सुधार लाता है| इससे श्वास प्रक्रिया सामान्य होती है, बेचैनी में तुरंत आराम मिलता है| अच्छी नींद आती है, डर व  क्रोध में कमी आती है, मन प्रसन्न रहता है| शास्त्रीय या धीमी गति का संगीत और बांसुरी की धुन दिमाग को शांति व सुकून देती है| संगीत सुनने से शरीर के इम्यून, नर्वस सिस्टम और पाचन क्रिया पर अच्छा असर होता है| ऐसे में आपके मन में एक सवाल उठता है कि आखिर म्यूजिक को समझने का आसान तरीका क्या है? म्यूजिक को समझने का सीधा फार्मूला है- साउंड+रिदम+मेलोडी= म्यूजिक| पक्षियों की चहचहाट, नदियों के प्रभाव, पत्तियों को छूकर चलने वाली हवाओं में भी संगीत है, जिसे आप महसूस कर सकते हैं|
आजकल छोटे-छोटे बच्चे बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं| संगीत से उनको डिप्रेशन माइग्रेन जैसी बीमारियों से बचाया जा सकता है| म्यूजिक थेरेपी काफी पॉपुलर हो गई है| जो बच्चे चंचल होते हैं, उनके लिए  तो संगीत वरदान है| यदि वे संगीत में रुचि लेने लगे तो उनकी एकाग्रता में वृद्धि होती है| अगर आप भी चाहते हैं कि आपका बच्चा पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करें और अच्छा इंसान भी बने, तो बच्चे में जन्म के बाद से ही संगीत के संस्कार डाल दे| संगीत से सुनने, समझने और सीखने की शक्ति बढ़ती है, जिससे  वरबल आईक्यू, स्मरण शक्ति में तेजी आती है|
 किन रागों से रोगों का इलाज
1.ह्रदय रोग दरबारी, सारंग
2.अस्थमा मालकोश, ललित
3.ब्लड प्रेशर भैरवी, भूपाली
4.एसिडिटी - खमाज
5.अनिद्रा भैरवी, सोहनी
6.डिप्रेशन बिहाग, मधुवंती
7. कमजोरी - जेजेवंती
8.खून की कमी - पीलू
9.याददाश्त - शिवरंजनी
10.सिरदर्द भैरव|

आपको किस चीज से डर लगता है ? जिस तरह हम खुश या दुखी होते हैं , ठीक उसी तरह हमें कुछ बातों से डर भी लगता हैं |   कुछ हद तक तो यह डर स...


आपको किस चीज से डर लगता है?

जिस तरह हम खुश या दुखी होते हैं, ठीक उसी तरह हमें कुछ बातों से डर भी लगता हैं|  कुछ हद तक तो यह डर सामान्य ही होता है, लेकिन कभी-कभी आपका यह डर आपको आगे बढ़ने और सफलता के पायदान चढ़ने से रोकता है| ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि आप डर का दामन छोड़ कर खुद को सफलता की ओर आगे बढ़ाएं| इसके लिए कुछ चीजों के बारे में जानना बहुत जरूरी हैं|
 करें सवाल
अपने डर को दूर करने का सबसे पहला कदम है कि आप खुद से कुछ सवाल पूछें| आप खुद से पूछें कि क्या आप जिस बात से डर रही हैं, वह जायज है भी या नहीं| अमूमन लोगों को सिर्फ इतना पता होता है कि उन्हें इस चीज को करने में डर लगता है, लेकिन उसके पीछे के कारणों के बारे में पता नहीं होता मसलन, उन्हें पता है कि वे लोगों के सामने अपनी बात रखने में डरते हैं या फिर किसी को अंधेरे से डर लगता है, तो किसी को चांदनी से| लेकिन उसके होने के पीछे की असली वजह के बारे में नहीं पता होगा|
 पहचाने
जिस तरह खुशी या गम के पीछे कारण होता है, ठीक उसी तरह डर का भी एक कारण होता है, आमतौर पर किसी भी व्यक्ति के डर के दो कारण होते हैं | पहला अगर आप किसी चीज में सक्षम नहीं है, तो आप उसे करने में डरती हैं | मसलन , अगर आपकी अंग्रेजी अच्छी नहीं है, तो आप लोगों के बीच बात करने में डरेगी|  वहीं, दूसरा डर काल्पनिक होता है और उसका कोई आधार नहीं होता| मसलन, कुछ लोगों को ऊंचाई, अंधेरे या फिर पानी से डर लगता हैं| याद रखें कि किसी भी बीमारी का इलाज तभी होता है| जब आपको वास्तविक बीमारी के बारे में पता हो|
करे सामना
  डर को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप उसका सामना करें| जब आपको यह पता चल जाता है कि आपको किस चीज से डर लगता है और उस काम को करने का अंजाम क्या होगा तो आपके लिए उसका सामना करना आसान हो जाएगा| इसके लिए आप कुछ ठोस कदम उठा सकती हैं| इससे आपके अंदर एक आत्मविश्वास पैदा होगा और धीरे-धीरे आपका डर भी खत्म होगा| अगर आपने पहले किसी बुरे अनुभव का सामना किया भी है , तो हर बार आपके साथ ऐसा ही हो, यह जरूरी नहीं है|  हादसे तो हर किसी के साथ होते हैं , लेकिन हादसों से जिंदगी रुकती नहीं है| इसलिए एक बार जब आप अपने डर का सामना कर लेंगे, तो यकीनन आपके मन का सारा डर खत्म हो जाएगा|